उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा कराई गई स्टाफ नर्स का परीक्षा परिणाम शक के घेरे में,विभिन्न संगठनों एवम नर्सों ने लगाया आरोप


उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के द्वारा कराई गई स्टाफ नर्स की भर्ती परीक्षा परिणाम भी अब शक के घेरे में आ गया है।परीक्षा परिणाम के ऊपर विभिन्न संगठनों एवम मेल एवम फीमेल नर्सों ने उंगली भी उठाना शुरू कर दिया है।

लोक सेवा आयोग के द्वारा 17 दिसंबर 2017 को इलाहाबाद एवम लखनऊ के परीक्षा केंद्रों पर महिला स्टाफ नर्स की भर्ती परीक्षा करवाई।ये भर्ती खुली भर्ती थी जिसमे संविदा,आउटसोर्सिंग एवम फ्रेशर्स सभी अप्लाई कर सकते थे।।परीक्षा सकुशल सम्पन्न हुई।प्रश्नगत परीक्षा में 23394 इसके पश्चात आयोग कार्यालय द्वारा 16 मार्च 2018 तक आवेदन पत्र प्राप्ति की तिथि रखी गयी। आयोग के अनुसार अंतिम तिथि तक 20408 आवेदन ही पहुच सके जिसको आधार बना आयोग के द्वारा परिणाम की कार्यवाही की गई।जिसके अलावा आयोग ने एक सूची और जारी की जिसमे 181अभ्यर्थियों के आवेदन रद्द करने की संस्तुति की गई।
अभ्यर्थियों के अनुसार सर्वप्रथम 23394 और 20408 के बीच का अंतर भी प्रश्नगत चिन्ह है जो कि 23394 से 181 घटाने पर कही नही आ रहा।

प्रश्नपत्र पद का चयन 100 अंकों का था जिसमे लिखित अंकों पर 85 अंक थे एवम अनुभव के संबंध में उत्तरप्रदेश संविदा के आधार पर अधिकतम 15 अंक निर्धारित थे ।जिसके परिणाम स्वरूप चिकित्सा एवम स्वास्थ सेवा उप्र के लिए कुल 3628 पदों के सापेक्ष 1830 एवम चिकित्सा शिक्षा एवम प्रशिक्षण के लिए 753 पदों के सापेक्ष 558 अभ्यर्थियों का परिणाम योग्यता दर्शाते हुए रोल नम्बर एवम नाम के साथ uppsc की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई।
आयोग के द्वारा ये भी बताया गया कि सामान्य/ पिछड़ी एवम एस सी/एस टी के लिए क्रमश 40% एवम 30 % ही प्राप्त दक्षता मानक है।जिसमे उपरोक्त बताये गए ही योग्य है बाकी कोई अभ्यर्थी न्यूनतम दक्षता मानक पूरा नही करते जिससे शेष रिक्त सीटो को आयोग द्वारा अग्रेनित करने की संस्तुति कर दी गयी।
जो कि अभ्यथियों को पचने से परे हो गया।
कारण भी था आयोग ने एक समझदारी ये कर दी कि परीक्षा परिणाम घोषित करने से पूर्व न कोई आंसर की जारी की न ही कोई कट ऑफ। आयोग ने सीधे अपनी वेबसाइट पर परिणाम ही दे दिया जिसमें आयोग द्वारा योग्य अभ्यर्थियों के योग्य नम्बर भी नही दिखाए गए।
परीक्षार्थियों के अनुसार आंसर शीट की कार्बन कॉपी सभी के पास थी जिसको उन्होंने जब खुद से जांच की तो अधिकतर अभ्यर्थी 40% एवम 30% से ज्यादा अंक प्राप्त करते हुए खुद को इस पद के योग्य बता रहे।आयोग के द्वारा ऐसा करना भी कही न कही एक संदेह ही पैदा कर रहा इन अभ्यर्थियों के बीच।
और तो और आयोग की समझदारी देखिए
आयोग ये भली भांति समझ रहा था कि परिणाम अभ्यर्थियों को पचेगा नही वे आयोग से इसके सापेक्ष जवाब मांगेंगे ही जिसका आधार जन सूचना अधिनियम 2005 ही होगा तो उससे पहले ही आयोग ने यह बोल के पल्ला झाड़ लिया कि जल्द ही आयोग प्रश्नगत परीक्षा परिणाम से संबंधित प्राप्तांक तथा श्रेणीवार/ पदवार कट ऑफ की सूचना जल्द ही वेबसाइट एवम समाचार पत्रों में प्रकाशित कर देगा एवम जिसके सापेक्ष सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त प्रार्थनापत्र आयोग स्वीकार नही करेगा और न ही उस पर विचार करेगा।


अब बेचारे बच्चे ये मानने को तैयार ही नही है हम अयोग्य है अभ्यर्थियों के अनुसार आयोग को परिणाम घोषित करने से पहले आंसर की या कट ऑफ़ जारी करना चाहिए था जिससे हमें ये पता चलता हम अयोग्य है और 2 नम्बर भी मिला है हमे तो हमे संतुष्टि हो जाती।
उनके अनुसार इस परीक्षा परिणाम में बहुत बड़ा झोलमाल हुआ है।जिससे आयोग जन सूचना देने से भी पल्ला झाड़ रही।

इसी कड़ी में परेशान अभ्यर्थी माननीय न्यायालय की शरण मे जाने को तैयार है और मौजूदा सरकार को मन भर कोशने को मजबूर हो रही।उनके अनुसार उन्हें न्याय नही मिला है आयोग द्वारा।आयोग ने किसी भी कोने से साफ सुथरा परिणाम नही घोषित किया कॉपी को दिखाया जाए कॉपी को दुबारा चेक किया जाए और अगर हम योग्य निकले तो रिक्त पदों को पूरा किया जाए।इसी क्रम में विभिन्न संघटनो ने एक बड़े आंदोलन की भी चेतावनी दे डाली।

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