वैचारिक प्रदूषण बढ़ेगा लिंगयातो को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने से:-आचार्य लोकेश

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) : कर्नाटक विधानसभा के चुनाव के लिए मतदान में अब एक महीना से भी कम समय बचा है। राज्य के लिंगायत समाज के मतदाताओं को रिझाने के लिए  राजनेता  एवम राजनैतिक पार्टीया जमकर एक दूसरे पर हमला बोल रही है । कर्नाटक विधानसभा चुनाव के देखते हुए एक ओर जहां राजनीतिक दल धर्म के आधार पर ध्रुविकरण और तुष्टिकरण की नीति में जुटे हैं। धर्मनिर्पेक्षता और लिंगायत समाज को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने या न देने के तमाम तर्क गिनाए जा रहे हैं। इस बीच कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरु में सभी धर्मों के धर्मगुरुओं ने एक मंच पर आकर सर्वधर्म सद्भाव का संदेश देते हुए मंच साझा किया। सिद्धरमैया सरकार ने चतुराई से अपने प्रस्ताव में केवल उन्हीं लिंगायतों को अलग धर्म में शामिल होने का प्रस्ताव पास किया है जो भगवान बासवेश्वरा के अनुयाई हैं। अब भाजपा न इस फैसले का समर्थन कर पा रही है और न ही खुलकर विरोध।  अब जबकि चुनाव प्रचार राज्य में पूरे शवाब पर है अमित शाह से लेकर भाजपा के दूसरे छोटे बड़े नेता तक लिंगायतों को प्रभावित करने के लिए उनके धर्मगुरुओं के मठों में चक्कर लगा रहे हैं। लंदन में मोदी के आज के कार्यक्रम को भी लिंगायत वोट वैंक को खुश करने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। जाति और धर्म के भंवर में उलझे चुनाव प्रचार के बीच बैंगलुरु के होटल ललित अशोका में हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, जैन सभी ने एकजुट होकर देश में सर्वधर्म सद्भाव के महत्व को समझाते हुए वोट बैंक की राजनीति और अल्पसंख्यक मानसिकता से बाहर आने की अपील की। अहिंसा विश्वभारती के संस्थापक जैन आचार्य डॉ लोकेश मुनि ने कहा कि अल्पसंख्यक का दर्जा धर्म के आधार पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर दिया जाना चाहिए। तभी इसका सद्उपयोग हो सकेगा अन्यथा यह केवल वोट बैंक की राजनीति से ज्यादा कुछ साबित नहीं होगा। लिंगायत समाज को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा दिये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि समाज में अन्य सभी प्रदूषण से बड़ा वैचारिक प्रदूषण है, जिसे दूर किये जाने की जरूरत है क्योंकि इन्ही प्रदूषण की उपज है समाज में भेद-भाव। यदि इसे दूर कर लिया जाए तो अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक मानसिकता ही खत्म हो जाएगी। समाज लिंगायत को अल्पसंख्यक स्वीकार करता है और वोटबैंक की राजनीति की उपज नहीं तो इसमें कोई परहेज नहीं होना चाहिए।

 

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