न्यूज़ ग्राउंड एक्सक्लूसिव/एजेंसी

 

 

गोरखपुर। इस संसदीय क्षेत्र के लिए निवर्तमान सांसद और वर्तमान के सीएम उत्तर प्रदेश वाकई बदल गए हैं। आज जनता के मुँह से यह आवाज सुनने को मिली।यह पहली बार है कि खुद उनके शहर में उनके ही शहरवासियों ने काला झंडा दिखाया। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर हुए एक गठजोड़ का यह कार्यक्रम था। जिसको सिर्फ विरोध ही सुहाता हैं। गोरखपुरियों के लिए सीएम योगी अब से थोड़ा पहले महाराज जी थे। वह जब चाहते अपनी समस्या लेकर उनके सामने दरपेश हो जाते थे। लेकिन अब न तो वह समय रहा न पहले वाले महाराज जी। पहले के महाराज जी इंसेफेलाइटिस के इसी मुद्दे पर आंदोलनकारी की भूमिका में रहते थे।अब वह इस पर फैसलाकुन है, लेकिन कहते हैं कि सत्ता बेदर्द होती है। अब तमाम तामझामों से घिरे रहने वाले सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के सारे अमले ने बच्चों की मौत को सामान्य बताया। ऑक्सिजन की कमी की वजह को उन्होंने फ़ाइलों की जिल्द में शामिल नहीं किया।खैर तमाम पुख्ता सबूत इसे बता रहे है कि अधिकांश मौतें तो ऑक्सीजन न रहने की वजह से ही हुई।
अगर ऑक्सीजन की कमी नही थी तो इंसेफेलाइटिस वार्ड के डॉ. कफील खान लगातार सिलिंडरों का इंतजाम क्यों करते रहे,जिनको आज बी आर डी मेडिकल कॉलेज में उनके पद से हटा दिया गया।इसके अलावा इधर उधर से गैस क्यों मांगई गई।
फिलहाल ये शब्द आज किसी मीडिया कर्मी के नही बल्कि गोरखपुर की एक एक आम जनता के है।
या ये कहे उपरोक्त लिखित जनता के मुख से है तो अतिशयोक्ति नही होगी।

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